Wednesday, June 25, 2025

तेरी याद

  तेरी याद


मानसून सिर्फ़ बादलों, बूँदों और हवाओं का मौसम नहीं होता,

यह दिल की गहराइयों में बसी उन यादों का अहसास होता है,

जो हर रिमझिम में किसी अपने की मौजूदगी का एहसास कराती हैं।

इन्हीं भावों को समर्पित मेरी एक रचना — “बरसात में तेरी याद”।




बादलों की गूंज में घुला तेरा नाम है,

हर बिजली की चमक में तेरा पैग़ाम है।

पहली बारिश की बूँद जब गिरी गुलाब पर,

जैसे तेरी मुस्कान का पहला सलाम है।


ठंडी हवाएँ जब पत्तों को सहलाती हैं,

जैसे तेरी ज़ुल्फ़ें रूह को छू जाती हैं।

हर लहराता पत्ता कहता है ये दास्तान,

तू पास न हो कर भी, हर साँस में है मेहमान।


फूलों पर मँडराती रंग-बिरंगी तितली,

तेरी ही यादों की परछाईं सी लगती।

हर रंग में तू है, हर खुशबू में तू,

सावन की हर बूँद में बसी रू-ब-रू तू।


तेरा साथ हो तो राहें भी गीत बन जाएँ,

हर सफ़र तेरी साँसों की सुरभि पा जाए।

तेरे बिना भी ये मौसम तुझसे सराबोर है,

ये बरसात नहीं — तेरे एहसासों का शोर है।




☔ अंतर्मन की बात


हर मौसम अपना रंग लाता है, पर सावन — वो तो बस दिल की बात करता है।

इस रचना के माध्यम से मैंने वही एहसास साझा किया है जो शायद आपने भी कभी महसूस किया हो —

किसी की मौजूदगी, उसकी याद, उसका साथ… जो हर बारिश में फिर से लौट आता है।




आपको यह कविता कैसी लगी?

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क्या कभी बरसात ने आपको भी किसी की याद दिलाई?

1 comment:

  1. कभी देखी न सुनी ऐसी तिलिस्मात की रात
    ज़िंदगी-भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात

    ReplyDelete

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