गुज़रा हुआ प्यार
बीती हुई मोहब्बत
बीतती क्यों नहीं है?
उसके दीदार की आरज़ू
आज भी क्यों जिन्दा है?
जी से छूटती क्यों नहीं है?
वो पहले इश्क़ की चाहत
मन से रूठती क्यों नहीं है?
पीछे छूट गए थे जो ज़ख्म
उनकी टीस सूखती क्यों नहीं है?
तेरी प्यार भरी नज़र
की कसक छूटती क्यों नहीं है?
आज भी तेरा इंतज़ार करते
इस दिल की धडक्कन टूटती क्यों नहीं है?
मेरी रूह तेरी रूह को है ढूंढती
तेरी रूह मुझे ढूंढती क्यों नहीं है?
उस दिन तुम मिले थे एक नेहमत की तरह
मेरी दुआओं का तुम जवाब थे
फिर से कबूल हो जायो
रूह से रूह का राब्ता किस्मत जोड़ती क्यों नहीं है?
मन से मन की डोरी फिर से उलझती क्यों नहीं है?
