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Friday, August 8, 2025

एक सपनों की दुनिया हो ✨

 एक सपनों की दुनिया हो ✨
एक सपनों की दुनिया हो ✨



एक सपनों की दुनिया हो,
जहाँ आईना सिर्फ़ सच का हो।

मंज़िल हो एक सुनहरा सफ़र,
जहाँ हर दिल में उड़ने का हौसला हो।

ना कोई भेदभाव की दीवारें,
ना कोई शिकवा, ना कोई शिकन।

बस समंदर की गहराइयों से भी गहरा,
कुछ कर गुज़रने का जज़्बा हो मन में।

ना रंग, ना जाति, ना कोई पहचानों का फेर,
इंसान की पहचान सिर्फ़ इंसानियत से हो।

जहाँ हर दिल में ममता, हर आँख में चमक,
और हर कदम पर एकता का स्वर हो।

बस ऐसी हो ये दुनिया,
जहाँ हर साँस में बसी हो सच्चाई की खुशबू। 🌿

✍️ कविता का सार:

“एक सपनों की दुनिया हो” एक ऐसी कल्पना है जहाँ
सिर्फ सच्चाई, इंसानियत और एकता का राज हो।
यह कविता भेदभाव से मुक्त, प्रेम और भरोसे से भरी
आदर्श दुनिया की तस्वीर पेश करती है।

इसमें लेखक ने उस समाज की कल्पना की है
जहाँ हर दिल में उड़ने का हौसला हो,
हर कदम पर एकता हो,
और इंसान की पहचान सिर्फ इंसानियत से हो।

Wednesday, June 25, 2025

तेरी याद

  तेरी याद


मानसून सिर्फ़ बादलों, बूँदों और हवाओं का मौसम नहीं होता,

यह दिल की गहराइयों में बसी उन यादों का अहसास होता है,

जो हर रिमझिम में किसी अपने की मौजूदगी का एहसास कराती हैं।

इन्हीं भावों को समर्पित मेरी एक रचना — “बरसात में तेरी याद”।




बादलों की गूंज में घुला तेरा नाम है,

हर बिजली की चमक में तेरा पैग़ाम है।

पहली बारिश की बूँद जब गिरी गुलाब पर,

जैसे तेरी मुस्कान का पहला सलाम है।


ठंडी हवाएँ जब पत्तों को सहलाती हैं,

जैसे तेरी ज़ुल्फ़ें रूह को छू जाती हैं।

हर लहराता पत्ता कहता है ये दास्तान,

तू पास न हो कर भी, हर साँस में है मेहमान।


फूलों पर मँडराती रंग-बिरंगी तितली,

तेरी ही यादों की परछाईं सी लगती।

हर रंग में तू है, हर खुशबू में तू,

सावन की हर बूँद में बसी रू-ब-रू तू।


तेरा साथ हो तो राहें भी गीत बन जाएँ,

हर सफ़र तेरी साँसों की सुरभि पा जाए।

तेरे बिना भी ये मौसम तुझसे सराबोर है,

ये बरसात नहीं — तेरे एहसासों का शोर है।




☔ अंतर्मन की बात


हर मौसम अपना रंग लाता है, पर सावन — वो तो बस दिल की बात करता है।

इस रचना के माध्यम से मैंने वही एहसास साझा किया है जो शायद आपने भी कभी महसूस किया हो —

किसी की मौजूदगी, उसकी याद, उसका साथ… जो हर बारिश में फिर से लौट आता है।




आपको यह कविता कैसी लगी?

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क्या कभी बरसात ने आपको भी किसी की याद दिलाई?

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