एक सपनों की दुनिया हो ✨
मंज़िल हो एक सुनहरा सफ़र,
जहाँ हर दिल में उड़ने का हौसला हो।
ना कोई भेदभाव की दीवारें,
ना कोई शिकवा, ना कोई शिकन।
बस समंदर की गहराइयों से भी गहरा,
कुछ कर गुज़रने का जज़्बा हो मन में।
ना रंग, ना जाति, ना कोई पहचानों का फेर,
इंसान की पहचान सिर्फ़ इंसानियत से हो।
जहाँ हर दिल में ममता, हर आँख में चमक,
और हर कदम पर एकता का स्वर हो।
बस ऐसी हो ये दुनिया,
जहाँ हर साँस में बसी हो सच्चाई की खुशबू। 🌿
✍️ कविता का सार:
“एक सपनों की दुनिया हो” एक ऐसी कल्पना है जहाँ
सिर्फ सच्चाई, इंसानियत और एकता का राज हो।
यह कविता भेदभाव से मुक्त, प्रेम और भरोसे से भरी
आदर्श दुनिया की तस्वीर पेश करती है।
इसमें लेखक ने उस समाज की कल्पना की है
जहाँ हर दिल में उड़ने का हौसला हो,
हर कदम पर एकता हो,
और इंसान की पहचान सिर्फ इंसानियत से हो।

Nice
ReplyDeleteGiving words to your thoughts is not easy, very few could do it.
ReplyDeleteWell done !!