Friday, August 1, 2025

एक ख़त जो कभी लिखा नहीं गया

 ✨ अधूरे जज़्बात

एक ख़त जो कभी लिखा नहीं गया

अधूरे जज़्बात




कुछ जज़्बात ऐसे होते हैं जो कभी मुकम्मल नहीं होते —

ना लफ़्ज़ों में ढल पाते हैं, ना किसी कहानी में।

ये कविता उन एहसासों की है जो अधूरे रहकर भी दिल में सबसे गहराई से बसते हैं।



🖤 कविता: अधूरे जज़्बात


कुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं,

कहीं दब जाती हैं किसी अंधेरे कोने में।

लिखता हूँ क़लम से तो सही,

पर अधूरे जज़्बातों की अधूरी कहानी कैसे लिखूँ?


तेरी यादें अब भी पुरानी किताबों में हैं,

जहाँ तन्हाई भी चुपचाप मुस्कुराती है।

कोशिश करता हूँ एक नई उड़ान की,

पर यादों की ज़ंजीरें आज़ाद कहाँ होने देती हैं।


हाल कुछ यूँ है कि —

हर कविता एक अधूरी दास्तान बन जाती है,

कभी टूटी मोहब्बत की,

कभी ख़ुद से बिछड़ने की।

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4 comments:

  1. It is deep. Loved it.

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  2. Thank you for your time and kind words. Your support is truly appreciated. 🙏🏼

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  3. Reading these beautiful lines makes you to do something about it.
    Lovely

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