Saturday, June 28, 2025

“बचपन की यादें —एक अनमोल याद ।”

बचपन… ज़िंदगी का सबसे मासूम और बेफ़िक्र दौर।

ना कोई चिंता, ना कोई डर। सिर्फ़ खेल, दोस्ती, कहानियाँ और ख़ुशियाँ

कभी मिट्टी में खेलते हुए, तो कभी आसमान में उड़ते सपनों के पीछे भागते हुए,

वो दिन कैसे बीत गए — पता ही नहीं चला।

आइए, इन पंक्तियों के ज़रिए एक बार फिर लौट चलते हैं बचपन की उन्हीं मीठी यादों में…


जाने कहाँ चले गए वो बचपन के दिन

जब खेलना, हँसना ही काम था।

ना गर्मी लगती, ना ही ठंड,

जब होता दोस्तों का साथ था।


वो छुपा-छुपी खेलना, कभी कुदरत के साथ बातें करना,

ना जाने कहाँ चले गए वो दिन।


वो साँप-सीढ़ी का खेल, चोर-सिपाही,

लूडो, गुल्ली-डंडा खेलना।

वो रातों को तारे देखना,

चंदा मामा की कहानियाँ पढ़ना,

ना जाने कहाँ चले गए वो दिन।


वो सुबह उठना, स्कूल को जाना,

दोस्तों से मिलना जैसे दिल को सुकून मिल जाना।

धीरे-धीरे वक़्त बदलता गया ख़ामोशी से,

पता ही नहीं चला कब छूट गए खिलौने हाथों से।


जब भी यादों की गहराइयों में कुछ बचपन के पल याद करता हूँ अब,

कितने सुहाने दिन थे — सोचता हूँ,

जो अब लौट के नहीं आएंगे।

बचपन की यादें
बचपन की यादें




अंत की कुछ बातें…


बचपन सिर्फ़ एक उम्र नहीं होती —

वो एहसास होता है, जो दिल में बस जाता है और उम्र भर साथ चलता है।

आज हम चाहे कितने भी व्यस्त क्यों ना हों, दिल के किसी कोने में आज भी वो दोस्त, वो खेल, और वो कहानियाँ ज़िंदा हैं।


अगर ये पंक्तियाँ पढ़कर आपके भी बचपन के दोस्त याद आ गए हों,

तो इसे ज़रूर साझा करें उन्हीं दोस्तों के साथ,

जिनके बिना वो बचपन अधूरा था

                            

👉 क्या आपको भी अपना बचपन याद आता है?
🎬 तो अभी YouTube पर “Bachpan Ki Yaadein” देखें और महसूस करें।



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