मौन – जब चुप्पी बोल उठती है
कभी-कभी ज़िंदगी में वो क्षण आते हैं जब शब्द मौन हो जाते हैं और खामोशी बोलने लगती है। मौन केवल चुप रहना नहीं, बल्कि आत्मा की सबसे सशक्त भाषा है। यह कविता “मौन” — एक गहरे भाव से जुड़ी अभिव्यक्ति है, जहाँ चुप्पी स्वयं संवाद बन जाती है।
मौन
शब्द बोलते हैं, पर मौन समझाता है,
जहाँ वाणी रुक जाती है, वहाँ मौन गहराता है।
भीड़ में भी चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है,
जो कहा नहीं गया — वही तो रह जाता है।
मौन कोई कमजोरी नहीं, एक शक्ति है,
यह मन की भाषा है, आत्मा की भक्ति है।
कभी शांति, कभी विद्रोह का संकेत बन जाता है,
यह जो नहीं कहे — वो भी तो सुनाता है।
जब आँखें बोलती हैं और होंठ चुप रहते हैं,
तब मौन के अर्थ बहुत कुछ कहते हैं।
हर उत्तर ज़रूरी नहीं शब्दों में मिले,
कुछ सवाल मौन में ही हल हो जाते हैं।
सुनो — उस खामोशी को जो दिल के पास है,
क्योंकि मौन भी एक संवाद का एहसास है।
जिसे समझ सको — तो दुनिया बदल जाती है,
वरना जीवन केवल शोर बनकर रह जाती है।
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| मौन – जब चुप्पी बोल उठती है |
🌿 मौन की सुंदरता को समझना क्यों ज़रूरी है?
• जब हम मौन होते हैं, हम भीतर की आवाज़ को सुन पाते हैं।
• मौन हमें आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है।
• हर संघर्ष, हर प्रेम, हर पीड़ा को शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता — वहाँ मौन अपनी भूमिका निभाता है।
