Thursday, June 26, 2025

मंज़िल की ओर

 कविता का परिचय

जीवन एक यात्रा है — कभी सरल, कभी चुनौतीपूर्ण। कुछ सपनों, कुछ वादों, और अपार साहस के साथ जब कोई इंसान निकलता है अपनी मंज़िल की ओर, तो यह कविता उसी यात्रा की अभिव्यक्ति है। करनदीप सिंह द्वारा रचित यह रचना संघर्ष और आत्म-प्रेरणा का सजीव चित्रण है।



मंज़िल ढूँढ़ने निकला था मैं,

कुछ सपने थे दिल में मेरे।

धीरे-धीरे बढ़ता चला गया,

कुछ अरमान थे सीने में मेरे।


काँटे थे राहों में, पर जुनून भी था भीतर,

कुछ अपने मिले, कुछ पराए भी।

मिले वो भी सफ़र में, जो थककर चूर हो गए,

हर किसी की अपनी दास्तान, अपने रास्ते थे।

मैं भी बढ़ता रहा —

यूँ ही अपनी मंज़िल की ओर।


दूर तक देखा — कुछ नज़र नहीं आया,

पीछे देखा — बहुत कुछ पीछे छूट चुका था।

बीच में सोचा —

कैसे बढ़ता रहूँ आगे?

जब वर्तमान स्वयं कह रहा था —

“आराम कर लो किसी पेड़ की छाँव में।”


पर न रुका, न झुका, न ही थमा,

बस बढ़ता गया अपने पथ पर,

कुछ सपनों के संग, कुछ अरमानों के साथ,

कुछ वादों को निभाने की चाह में।


बस चलता रहा…

इस काँटों भरे सफ़र में,

क्योंकि मेरी इरादों  में

मंज़िल पाने का हौसला था।

मंज़िल की ओर
मंज़िल की ओर

📌 अंत में…

"मंज़िल की ओर" सिर्फ़ एक कविता नहीं, बल्कि एक सोच है — जो हर उस इंसान के भीतर हौसला भरती है, जो जीवन की किसी भी राह पर अपनी मंज़िल की तलाश में है। यह उन लम्हों की आवाज़ है, जब हम थकते हैं, रुकना चाहते हैं, लेकिन फिर भी अपने भीतर से आवाज़ आती है — "चलते रहो।"

हर रास्ता कठिन हो सकता है, राहों में काँटे बिछे हो सकते हैं, पर अगर हौसला ज़िंदा है — तो मंज़िल कभी दूर नहीं होती। यही संदेश यह कविता अपने हर शब्द के ज़रिए हमें देती है।

आपकी मंज़िल भी कहीं आपका इंतज़ार कर रही है, वो सिर्फ़ आपके क़दमों की आहट सुनना चाहती है। इसलिए चलना मत छोड़िए — क्योंकि चलना ही ज़िंदगी है।

अगर यह कविता आपको ज़रा भी प्रेरणा दे पाई हो, तो इसे अपने दिल में सहेजिए — और अपने सफ़र का एक हिस्सा बनाइए।

क्योंकि मंज़िल सिर्फ़ एक ठिकाना नहीं, बल्कि उस सफ़र का नाम है जहाँ हम न केवल अपनी मंज़िल पाते हैं — बल्कि खुद को भी पहचानते हैं।
और यही इस कविता की असली आत्मा है।




1 comment:

Some stories are meant to be read, some are meant to be felt. ❤️ If this story touched your heart, leave a few words below. Your जज़्बात matter, and we’d love to read them.

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